1-Balkand / Sarga 52
Shloka 14
Shloka
सत्क्रियां हि भवानेतां प्रतीच्छतु मया कृताम्।राजंस्त्वमतिथिश्रेष्ठः पूजनीयः प्रयत्नतः ॥१४॥
Sarga 52 / Shloka 14 Balkand