1-Balkand / Sarga 52
Shloka 10
Shloka
सर्वत्र कुशलं राजा वसिष्ठं प्रत्युदाहरत्।विश्वामित्रो महातेजा वसिष्ठं विनयान्वितम् ॥१०॥
Sarga 52 / Shloka 10 Balkand