1-Balkand / Sarga 51
Shloka 14
Shloka
अचिन्त्यकर्मा तपसा ब्रह्मर्षिरमितप्रभः।विश्वामित्रो महातेजा वेद्म्येनं परमां गतिम् ॥१४॥
Sarga 51 / Shloka 14 Balkand