1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 50 / Shloka 24 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 50
Shloka 24

Balkand

77 Sarga
25 Shloka
1/50/24
1-Balkand / Sarga 50 Shloka 24
Shloka
अहल्यादर्शनं चैव गौतमेन समागमम्।
महाधनुषि जिज्ञासां कर्तुमागमनं तथा ॥२४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इसके बाद उन्होंने उन दोनोंके सिद्धाश्रममें निवास, राक्षसोंके वध, बिना किसी घबराहटके मिथिलातक आगमन, विशालापुरीके दर्शन, अहल्याके साक्षात्कार तथा महर्षि गौतमके साथ समागम आदिका विस्तारपूर्वक वर्णन किया। फिर अन्तमें यह भी बताया कि ‘ये आपके यहाँ रखे हुए महान् धनुषके सम्बन्धमें कुछ जाननेकी इच्छासे यहाँतक आये हैं’॥ २३-२४॥