1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 50 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 50
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
25 Shloka
1/50/23
1-Balkand / Sarga 50 Shloka 23
Shloka
सिद्धाश्रमनिवासं च राक्षसानां वधं तथा।
तत्रागमनमव्यग्रं विशालायाश्च दर्शनम् ॥२३॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इसके बाद उन्होंने उन दोनोंके सिद्धाश्रममें निवास, राक्षसोंके वध, बिना किसी घबराहटके मिथिलातक आगमन, विशालापुरीके दर्शन, अहल्याके साक्षात्कार तथा महर्षि गौतमके साथ समागम आदिका विस्तारपूर्वक वर्णन किया। फिर अन्तमें यह भी बताया कि ‘ये आपके यहाँ रखे हुए महान् धनुषके सम्बन्धमें कुछ जाननेकी इच्छासे यहाँतक आये हैं’॥ २३-२४॥