1-Balkand / Sarga 50
Shloka 16
Shloka
ततो भागार्थिनो देवान् द्रष्टुमर्हसि कौशिक।इत्युक्त्वा मुनिशार्दूलं प्रहृष्टवदनस्तदा ॥१६॥
Sarga 50 / Shloka 16 Balkand