1-Balkand / Sarga 50
Shloka 13
Shloka
दृष्ट्वा स नृपतिस्तत्र विश्वामित्रमथाब्रवीत्।अद्य यज्ञसमृद्धिर्मे सफला दैवतैः कृता ॥१३॥
Sarga 50 / Shloka 13 Balkand