1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 5 / Shloka 2 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 5
Shloka 2

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/5/2
1-Balkand / Sarga 5 Shloka 2
Shloka
येषां स सगरो नाम सागरो येन खानितः ।
षष्टिपुत्रसहस्राणि यं यान्तं पर्यवारयन् ॥१-५-२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

यह सारी पृथ्वी पूर्वकालमें प्रजापति मनुसे लेकर अबतक जिस वंशके विजयशाली नरेशोंके अधिकारमें रही है, जिन्होंने समुद्रको खुदवाया था और जिन्हें यात्राकालमें साठ हजार पुत्र घेरकर चलते थे, वे महाप्रतापी राजा सगर जिनके कुलमें उत्पन्न हुए, इन्हीं इक्ष्वाकुवंशी महात्मा राजाओंकी कुलपरम्परामें रामायणनामसे प्रसिद्ध इस महान् ऐतिहासिक काव्यकी अवतारणा हुई है॥ १—३॥