1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 5 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 5
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/5/12
1-Balkand / Sarga 5 Shloka 12
Shloka
वधूनाटकसङ्घैश्च संयुक्तां सर्वतः पुरीम् ।
उद्यानाम्रवणोपेतां महतीं सालमेखलाम् ॥१-५-१२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस पुरीमें ऐसी बहुत-सी नाटक-मण्डलियाँ थीं, जिनमें केवल स्त्रियाँ ही नृत्य एवं अभिनय करती थीं। उस नगरीमें चारों ओर उद्यान तथा आमोंके बगीचे थे। लम्बाई और चौड़ाईकी दृष्टिसे वह पुरी बहुत विशाल थी तथा साखूके वन उसे सब ओरसे घेरे हुए थे॥ १२॥