1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 5 / Shloka 11 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 5
Shloka 11

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/5/11
1-Balkand / Sarga 5 Shloka 11
Shloka
सूतमागधसम्बाधां श्रीमतीमतुलप्रभाम् ।
उच्चाट्टालध्वजवतीं शतघ्नीशतसंकुलाम् ॥१-५-११॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

स्तुति-पाठ करनेवाले सूत और वंशावलीका बखान करनेवाले मागध वहाँ भरे हुए थे। वह पुरी सुन्दर शोभासे सम्पन्न थी। उसकी सुषमाकी कहीं तुलना नहीं थी। वहाँ ऊँची-ऊँची अट्टालिकाएँ थीं, जिनके ऊपर ध्वज फहराते थे। सैकड़ों शतघ्नियों (तोपों) से वह पुरी व्याप्त थी॥ ११॥