1-Balkand / Sarga 49
Shloka 22
Shloka
रामोऽपि परमां पूजां गौतमस्य महामुनेः।सकाशाद् विधिवत् प्राप्य जगाम मिथिलां ततः ॥२२॥
Sarga 49 / Shloka 22 Balkand