1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 49 / Shloka 18 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 49
Shloka 18

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/49/18
1-Balkand / Sarga 49 Shloka 18
Shloka
पाद्यमर्घ्यं तथाऽऽतिथ्यं चकार सुसमाहिता।
प्रतिजग्राह काकुत्स्थो विधिदृष्टेन कर्मणा ॥१८॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस समय श्रीराम और लक्ष्मणने बड़ी प्रसन्नताके साथ अहल्याके दोनों चरणोंका स्पर्श किया। महर्षि गौतमके वचनोंका स्मरण करके अहल्याने बड़ी सावधानीके साथ उन दोनों भाइयोंको आदरणीय अतिथिके रूपमें अपनाया और पाद्य, अर्घ्य आदि अर्पित करके उनका आतिथ्य-सत्कार किया। श्रीरामचन्द्रजीने शास्त्रीय विधिके अनुसार अहल्याका वह आतिथ्य ग्रहण किया॥ १७-१८॥