1-Balkand / Sarga 49
Shloka 14
Shloka
प्रयत्नान्निर्मितां धात्रा दिव्यां मायामयीमिव।धूमेनाभिपरीतांगीं दीप्तामग्निशिखामिव ॥१४॥
Sarga 49 / Shloka 14 Balkand