1-Balkand / Sarga 48
Shloka 32
Shloka
तस्यातिथ्येन दुर्वृत्ते लोभमोहविवर्जिता।मत्सकाशं मुदा युक्ता स्वं वपुर्धारयिष्यसि ॥३२॥
Sarga 48 / Shloka 32 Balkand