1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 48 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 48
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
33 Shloka
1/48/23
1-Balkand / Sarga 48 Shloka 23
Shloka
स सम्भ्रमात् त्वरन् राम शङ्कितो गौतमं प्रति।
गौतमं स ददर्शाथ प्रविशन्तं महामुनिम् ॥२३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इतनेहीमें उन्होंने देखा, देवताओं और दानवोंके लिये भी दुर्धर्ष, तपोबलसम्पन्न महामुनि गौतम हाथमें समिधा लिये आश्रममें प्रवेश कर रहे हैं। उनका शरीर तीर्थके जलसे भीगा हुआ है और वे प्रज्वलित अग्निके समान उद्दीप्त हो रहे हैं॥२३-२४॥