1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 47 / Shloka 6 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 47
Shloka 6

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/47/6
1-Balkand / Sarga 47 Shloka 6
Shloka
चत्वारस्तु सुरश्रेष्ठ दिशो वै तव शासनात्।
संचरिष्यन्ति भद्रं ते कालेन हि ममात्मजाः ॥६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘सुरश्रेष्ठ! तुम्हारा कल्याण हो। मेरे शेष चार पुत्रोंके गण तुम्हारी आज्ञासे समयानुसार सम्पूर्ण दिशाओंमें संचार करेंगे। तुम्हारे ही रखे हुए नामसे (तुमने जो ‘मा रुद:’ कहकर उन्हें रोनेसे मना किया था, उसी ‘मा रुद:’ इस वाक्यसे) वे सब-के-सब मारुत कहलायेंगे। मारुत नामसे ही उनकी प्रसिद्धि होगी’॥ ६॥