1-Balkand / Sarga 47
Shloka 4
Shloka
वातस्कन्धा इमे सप्त चरन्तु दिवि पुत्रक।मारुता इति विख्याता दिव्यरूपा ममात्मजाः ॥४॥
Sarga 47 / Shloka 4 Balkand