1-Balkand / Sarga 47
Shloka 19
Shloka
इहाद्य रजनीमेकां सुखं स्वप्स्यामहे वयम्।श्वः प्रभाते नरश्रेष्ठ जनकं द्रष्टुमर्हसि ॥१९॥
Sarga 47 / Shloka 19 Balkand