1-Balkand / Sarga 47
Shloka 18
Shloka
इक्ष्वाकोस्तु प्रसादेन सर्वे वैशालिका नृपाः।दीर्घायुषो महात्मानो वीर्यवन्तः सुधार्मिकाः ॥१८॥
Sarga 47 / Shloka 18 Balkand