1-Balkand / Sarga 47
Shloka 11
Shloka
दितिं यत्र तपःसिद्धामेवं परिचचार सः।इक्ष्वाकोस्तु नरव्याघ्र पुत्रः परमधार्मिकः ॥११॥
Sarga 47 / Shloka 11 Balkand