1-Balkand / Sarga 47
Shloka 10
Shloka
जग्मतुस्त्रिदिवं राम कृतार्थाविति नः श्रुतम्।एष देशः स काकुत्स्थ महेन्द्राध्युषितः पुरा ॥१०॥
Sarga 47 / Shloka 10 Balkand