1-Balkand / Sarga 46
Shloka 9
Shloka
तपस्तस्यां हि कुर्वत्यां परिचर्यां चकार ह।सहस्राक्षो नरश्रेष्ठ परया गुणसम्पदा ॥९॥
Sarga 46 / Shloka 9 Balkand