1-Balkand / Sarga 46
Shloka 23
Shloka
तदन्तरमहं लब्ध्वा शक्रहन्तारमाहवे।अभिन्दं सप्तधा देवि तन्मे त्वं क्षन्तुमर्हसि ॥२३॥
Sarga 46 / Shloka 23 Balkand