1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 46 / Shloka 16 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 46
Shloka 16

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/46/16
1-Balkand / Sarga 46 Shloka 16
Shloka
इत्युक्त्वा च दितिस्तत्र प्राप्ते मध्यं दिनेश्वरे।
निद्रयापहृता देवी पादौ कृत्वाथ शीर्षतः ॥१६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ऐसा कहकर दिति नींदसे अचेत हो गयीं। उस समय सूर्यदेव आकाशके मध्य भागमें आ गये थे—दोपहरका समय हो गया था। देवी दिति आसनपर बैठी-बैठी झपकी लेने लगीं। सिर झुक गया और केश पैरोंसे जा लगे। इस प्रकार निद्रावस्थामें उन्होंने पैरोंको सिरसे लगा लिया॥ १६॥