1-Balkand / Sarga 45
Shloka 33
Shloka
अप्सु निर्मथनादेव रसात् तस्माद् वरस्त्रियः।उत्पेतुर्मनुजश्रेष्ठ तस्मादप्सरसोऽभवन् ॥३३॥
Sarga 45 / Shloka 33 Balkand