1-Balkand / Sarga 45
Shloka 29
Shloka
पालयास्मान् महाबाहो गिरिमुद्धर्तुमर्हसि।इति श्रुत्वा हृषीकेशः कामठं रूपमास्थितः ॥२९॥
Sarga 45 / Shloka 29 Balkand