1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 44 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 44
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/44/23
1-Balkand / Sarga 44 Shloka 23
Shloka
यः शृणोति च काकुत्स्थ सर्वान् कामानवाप्नुयात् ।
सर्वे पापाः प्रणश्यन्ति आयुः कीर्तिश्च वर्धते ॥१-४४-२३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ककुत्स्थकुलभूषण! जो इसका श्रवण करता है, वह सम्पूर्ण कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और आयुकी वृद्धि एवं कीर्तिका विस्तार होता है॥ २३॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें चौवालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४४॥