1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 44 / Shloka 22 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 44
Shloka 22

Balkand

77 Sarga
23 Shloka
1/44/22
1-Balkand / Sarga 44 Shloka 22
Shloka
प्रीयन्ते पितरस्तस्य प्रीयन्ते दैवतानि च ।
इदमाख्यानमायुष्यं गंगावतरणं शुभम् ॥१-४४-२२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

यह गंगावतरणका मंगलमय उपाख्यान आयु बढ़ानेवाला है। धन, यश, आयु, पुत्र और स्वर्गकी प्राप्ति करानेवाला है। जो ब्राह्मणों, क्षत्रियों तथा दूसरे वर्णके लोगोंको भी यह कथा सुनाता है, उसके ऊपर देवता और पितर प्रसन्न होते हैं॥ २१-२२॥