1-Balkand / Sarga 44
Shloka 14
Shloka
प्लावयस्व त्वमात्मानं नरोत्तम सदोचिते ।सलिले पुरुषश्रेष्ठ शुचिः पुण्यफलो भव ॥१-४४-१४॥
Sarga 44 / Shloka 14 Balkand