1-Balkand / Sarga 44
Shloka 12
Shloka
सा त्वया समतिक्रान्ता प्रतिज्ञा पुरुषर्षभ ।प्राप्तोऽसि परमं लोके यशः परमसम्मतम् ॥१-४४-१२॥
Sarga 44 / Shloka 12 Balkand