1-Balkand / Sarga 43
Shloka 8
Shloka
हिमवत्प्रतिमे राम जटामण्डलगह्वरे ।सा कथंचिन्महीं गन्तुं नाशक्नोद् यत्नमास्थिता ॥१-४३-८॥
Sarga 43 / Shloka 8 Balkand