1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 43 / Shloka 7 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 43
Shloka 7

Balkand

77 Sarga
41 Shloka
1/43/7
1-Balkand / Sarga 43 Shloka 7
Shloka
तिरोभावयितुं बुद्धिं चक्रे त्रिनयनस्तदा ।
सा तस्मिन् पतिता पुण्या पुण्ये रुद्रस्य मूर्धनि॥१-४३-७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

पुण्यस्वरूपा गंगा भगवान् रुद्रके पवित्र मस्तकपर गिरीं। उनका वह मस्तक जटामण्डलरूपी गुफासे सुशोभित हिमालयके समान जान पड़ता था। उसपर गिरकर विशेष प्रयत्न करनेपर भी किसी तरह वे पृथ्वीपर न जा सकीं॥ ७-८॥