1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 43 / Shloka 37 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 43
Shloka 37

Balkand

77 Sarga
41 Shloka
1/43/37
1-Balkand / Sarga 43 Shloka 37
Shloka
पूजयन्ति महात्मानं जह्नुं पुरुषसत्तमम् ।
गङ्गां चापि नयन्ति स्म दुहितृत्वे महात्मनः ॥१-४३-३७॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन्होंने गंगाजीको उन महात्मा नरेशकी कन्या बना दिया। (अर्थात् उन्हें यह विश्वास दिलाया कि गंगाजीको प्रकट करके आप इनके पिता कहलायेंगे।) इससे सामर्थ्यशाली महातेजस्वी जह्नु बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने कानोंके छिद्रोंद्वारा गंगाजीको पुन: प्रकट कर दिया, इसलिये गंगा जह्नुकी पुत्री एवं जाह्नवी कहलाती हैं॥ ३७-३८॥