1-Balkand / Sarga 43
Shloka 32
Shloka
गन्धर्वयक्षप्रवराः सकिन्नरमहोरगाः ।सर्वाश्चाप्सरसो राम भगीरथरथानुगाः ॥१-४३-३२॥
Sarga 43 / Shloka 32 Balkand