1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 43 / Shloka 32 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 43
Shloka 32

Balkand

77 Sarga
41 Shloka
1/43/32
1-Balkand / Sarga 43 Shloka 32
Shloka
गन्धर्वयक्षप्रवराः सकिन्नरमहोरगाः ।
सर्वाश्चाप्सरसो राम भगीरथरथानुगाः ॥१-४३-३२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

श्रीराम! उस समय समस्त देवता, ऋषि, दैत्य, दानव, राक्षस, गन्धर्व, यक्षप्रवर, किन्नर, बड़े-बड़े नाग, सर्प तथा अप्सरा—ये सब लोग बड़ी प्रसन्नताके साथ राजा भगीरथके रथके पीछे गंगाजीके साथ-साथ चल रहे थे। सब प्रकारके जलजन्तु भी गंगाजीकी उस जलराशिके साथ सानन्द जा रहे थे॥३१-३२॥