1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 43 / Shloka 29 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 43
Shloka 29

Balkand

77 Sarga
41 Shloka
1/43/29
1-Balkand / Sarga 43 Shloka 29
Shloka
पुनराकाशमाविश्य स्वाँल्लोकान् प्रतिपेदिरे ।
मुमुदे मुदितो लोकस्तेन तोयेन भास्वता ॥१-४३-२९॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस प्रकाशमान जलके सम्पर्कसे आनन्दित हुए सम्पूर्ण जगत्को सदाके लिये बड़ी प्रसन्नता हुई। सब लोग गंगामें स्नान करके पापहीन हो गयेउस प्रकाशमान जलके सम्पर्कसे आनन्दित हुए सम्पूर्ण जगत्को सदाके लिये बड़ी प्रसन्नता हुई। सब लोग गंगामें स्नान करके पापहीन हो गये॥२९॥