1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 43 / Shloka 14 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 43
Shloka 14

Balkand

77 Sarga
41 Shloka
1/43/14
1-Balkand / Sarga 43 Shloka 14
Shloka
सप्तमी चान्वगात् तासां भगीरथरथं तदा ।
भगीरथोऽपि राजर्षिर्दिव्यं स्यंदनमास्थितः ॥१-४३-१४॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनकी अपेक्षा जो सातवीं धारा थी, वह महाराज भगीरथके रथके पीछे-पीछे चलने लगी। महातेजस्वी राजर्षि भगीरथ भी दिव्य रथपर आरूढ़ हो आगे-आगे चले और गंगा उन्हींके पथका अनुसरण करने लगीं। इस प्रकार वे आकाशसे भगवान् शङ्करके मस्तकपर और वहाँसे इस पृथ्वीपर आयी थीं॥ १४-१५॥