1-Balkand / Sarga 41
Shloka 8
Shloka
स तं प्रदक्षिणं कृत्वा पृष्ट्वा चैव निरामयम् ।पितॄन् स परिपप्रच्छ वाजिहर्तारमेव च ॥१-४१-८॥
Sarga 41 / Shloka 8 Balkand