1-Balkand / Sarga 41
Shloka 24
Shloka
तच्छ्रुत्वा घोरसंकाशं वाक्यमंशुमतो नृपः ।यज्ञं निर्वर्तयामास यथाकल्पं यथाविधि ॥१-४१-२४॥
Sarga 41 / Shloka 24 Balkand