1-Balkand / Sarga 41
Shloka 16
Shloka
विसार्य निपुणां दृष्टिं ततोऽपश्यत् खगाधिपम् ।पितॄणां मातुलं राम सुपर्णमनिलोपमम् ॥१-४१-१६॥
Sarga 41 / Shloka 16 Balkand