1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 40 / Shloka 8 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 40
Shloka 8

Balkand

77 Sarga
30 Shloka
1/40/8
1-Balkand / Sarga 40 Shloka 8
Shloka
परिक्रान्ता मही सर्वा सत्त्ववन्तश्च सूदिताः ।
देवदानवरक्षांसि पिशाचोरगपन्नगाः ॥१-४०-८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘पिताजी! हमने सारी पृथ्वी छान डाली। देवता, दानव, राक्षस, पिशाच और नाग आदि बड़े-बड़े बलवान् प्राणियोंको मार डाला। फिर भी हमें न तो कहीं घोड़ा दिखायी दिया और न घोड़ेका चुरानेवाला ही। आपका भला हो। अब हम क्या करें? इस विषयमें आप ही कोई उपाय सोचिये’॥ ८-९॥