1-Balkand / Sarga 40
Shloka 5
Shloka
पितामहवचः श्रुत्वा त्रयस्त्रिंशदरिंदमाः ।देवाः परमसंहृष्टाः पुनर्जग्मुर्यथागतम् ॥१-४०-५॥
Sarga 40 / Shloka 5 Balkand