1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 40 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 40
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
30 Shloka
1/40/3
1-Balkand / Sarga 40 Shloka 3
Shloka
कापिलं रूपमास्थाय धारयत्यनिशं धराम् ।
तस्य कोपाग्निना दग्धा भविष्यन्ति नृपात्मजाः ॥१-४०-३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘देवगण! यह सारी पृथ्वी जिन भगवान् वासुदेवकी वस्तु है तथा जिन भगवान् लक्ष्मीपतिकी यह रानी है, वे ही सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि कपिल मुनिका रूप धारण करके निरन्तर इस पृथ्वीको धारण करते हैं। उनकी कोपाग्निसे ये सारे राजकुमार जलकर भस्म हो जायँगे॥ २-३॥