1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 4 / Shloka 36 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 4
Shloka 36

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/4/36
1-Balkand / Sarga 4 Shloka 36
Shloka
ततस्तु तौ रामवचः प्रचोदिता-
वगायतां मार्गविधानसम्पदा ।
स चापि रामः परिषद्गतः शनै-
र्बुभूषयासक्तमना बभूव ह ॥१-४-३६॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तदनन्तर श्रीरामकी आज्ञासे प्रेरित हो वे दोनों भाई मार्गविधानकी रीतिसे रामायणका गान करने लगे। सभामें बैठे हुए भगवान् श्रीराम भी धीरे-धीरे उनका गान सुननेमें तन्मय हो गये॥ ३६॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें चौथा सर्ग पूरा हुआ॥ ४॥