1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 4 / Shloka 22 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 4
Shloka 22

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/4/22
1-Balkand / Sarga 4 Shloka 22
Shloka
कश्चित् कमण्डलुं प्रादान्मौञ्जीमन्यो महामुनिः ।
बृसीमन्यस्तदा प्रादात् कौपीनमपरो मुनिः ॥१-४-२२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

एकने कमण्डलु दिया तो दूसरे महामुनिने मुञ्जकी मेखला भेंट की। तीसरेने आसन और चौथेने कौपीन प्रदान किया। किसी अन्य मुनिने हर्षमें भरकर उन दोनों बालकोंके लिये कुठार अर्पित किया। किसीने गेरुआ वस्त्र दिया तो किसी मुनिने चीर भेंट किया॥ २२—२३॥