1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 4 / Shloka 14 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 4
Shloka 14

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/4/14
1-Balkand / Sarga 4 Shloka 14
Shloka
महात्मानौ महाभागौ सर्वलक्षणलक्षितौ ।
तौ कदाचित् समेतानामृषीणां भावितात्मनाम् ॥१-४-१४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

एक दिनकी बात है, बहुत-से शुद्ध अन्त:करणवाले महर्षियोंकी मण्डली एकत्र हुई थी। उसमें महान् सौभाग्यशाली तथा समस्त शुभ लक्षणोंसे सुशोभित महामनस्वी कुश और लव भी उपस्थित थे। उन्होंने बीच सभामें उन महात्माओंके समीप बैठकर उस रामायणकाव्यका गान किया। उसे सुनकर सभी मुनियोंके नेत्रोंमें आँसू भर आये और वे अत्यन्त विस्मय-विमुग्ध होकर उन्हें साधुवाद देने लगे। मुनि धर्मवत्सल तो होते ही हैं; वह धार्मिक उपाख्यान सुनकर उन सबके मनमें बड़ी प्रसन्नता हुई॥ १४—१६॥