1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 4 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 4
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/4/13
1-Balkand / Sarga 4 Shloka 13
Shloka
ऋषीणां च द्विजातीनां साधूनां च समागमे ।
यथोपदेशं तत्त्वज्ञौ जगतुः सुसमाहितौ ॥१-४-१३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

वे दोनों राजपुत्र सब लोगोंकी प्रशंसाके पात्र थे, उन्होंने उस धर्मानुकूल उत्तम उपाख्यानमय सम्पूर्ण काव्यको जिह्वाग्र कर लिया था और जब कभी ऋषियों, ब्राह्मणों तथा साधुओंका समागम होता था, उस समय उनके बीचमें बैठकर वे दोनों तत्त्वज्ञ बालक एकाग्रचित्त हो रामायणका गान किया करते थे॥ १२-१३॥