1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 39 / Shloka 8 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 39
Shloka 8

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/39/8
1-Balkand / Sarga 39 Shloka 8
Shloka
राक्षसीं तनुमास्थाय यज्ञियाश्वमपाहरत् ।
ह्रियमाणे तु काकुत्स्थ तस्मिन्नश्वे महात्मनः ॥१-३९-८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘काकुत्स्थ! महामना सगरके उस अश्वका अपहरण होते समय समस्त ऋत्विजोंने यजमान सगरसे कहा—‘ककुत्स्थनन्दन! आज पर्वके दिन कोई इस यज्ञसम्बन्धी अश्वको चुराकर बड़े वेगसे लिये जा रहा है। आप चोरको मारिये और घोड़ा वापस लाइये, नहीं तो यज्ञमें विघ्न पड़ जायगा और वह हम सब लोगोंके लिये अमंगलका कारण होगा। राजन्! आप ऐसा प्रयत्न कीजिये, जिससे यह यज्ञ बिना किसी विघ्न-बाधाके परिपूर्ण हो’॥