1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 39 / Shloka 15 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 39
Shloka 15

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/39/15
1-Balkand / Sarga 39 Shloka 15
Shloka
यावत् तुरगसंदर्शस्तावत् खनत मेदिनीम् ।
तमेव हयहर्तारं मार्गमाणा ममाज्ञया ॥१-३९-१५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘अत: पुत्रो! तुमलोग जाओ, घोड़ेकी खोज करो। तुम्हारा कल्याण हो। समुद्रसे घिरी हुई इस सारी पृथ्वीको छान डालो। एक-एक योजन विस्तृत भूमिको बाँटकर उसका चप्पा-चप्पा देख डालो। जबतक घोड़ेका पता न लग जाय, तबतक मेरी आज्ञासे इस पृथ्वीको खोदते रहो। इस खोदनेका एक ही लक्ष्य है—उस अश्वके चोरको ढूँढ़ निकालना॥ १३—१५॥