1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 39 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 39
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/39/13
1-Balkand / Sarga 39 Shloka 13
Shloka
मन्त्रपूतैर्महाभागैरास्थितो हि महाक्रतुः ।
तद् गच्छत विचिन्वध्वं पुत्रका भद्रमस्तु वः ॥१-३९-१३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘अत: पुत्रो! तुमलोग जाओ, घोड़ेकी खोज करो। तुम्हारा कल्याण हो। समुद्रसे घिरी हुई इस सारी पृथ्वीको छान डालो। एक-एक योजन विस्तृत भूमिको बाँटकर उसका चप्पा-चप्पा देख डालो। जबतक घोड़ेका पता न लग जाय, तबतक मेरी आज्ञासे इस पृथ्वीको खोदते रहो। इस खोदनेका एक ही लक्ष्य है—उस अश्वके चोरको ढूँढ़ निकालना॥ १३—१५॥