1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 39 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 39
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/39/12
1-Balkand / Sarga 39 Shloka 12
Shloka
षष्टिं पुत्रसहस्राणि वाक्यमेतदुवाच ह ।
गतिं पुत्रा न पश्यामि रक्षसां पुरुषर्षभाः ॥१-३९-१२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘उस यज्ञ-सभामें बैठे हुए राजा सगरने उपाध्यायोंकी बात सुनकर अपने साठ हजार पुत्रोंसे कहा—‘पुरुषप्रवर पुत्रो! यह महान् यज्ञ वेदमन्त्रोंसे पवित्र अन्त:करणवाले महाभाग महात्माओंद्वारा सम्पादित हो रहा है; अत: यहाँ राक्षसोंकी पहुँच हो, ऐसा मुझे नहीं दिखायी देता (अत: यह अश्व चुरानेवाला कोई देवकोटिका पुरुष होगा)॥